नवाबगंज, समृद्धि न्यूज। होली का त्योहार रंगों और खुशियों का प्रतीक है, लेकिन जिन घरों में बीते वर्ष कोई अनहोनी हुई होती है, वहाँ त्योहार की रौनक फीकी पड़ जाती है। ऐसे परिवारों के दुखों को बांटने और उनके जीवन में पुन: उत्साह का संचार करने के लिए नवाबगंज नगर व क्षेत्र में फाग गायकों की टोलियां सक्रिय हो गई हैं। यह टोलियां अनराये उठाने की अनूठी परंपरा को निभाती हैं।
होली का त्योहार नजदीक आते ही नवाबगंज नगर एवं क्षेत्र में इसकी खुमारी बढ़ती जा रही है। त्योहार से पूर्व जिन घरों में गमी का माहौल होता है, वहाँ शाम ढलने के बाद ढोलक, चिमटा, झांझ, मंजीरा आदि वाद्य यंत्रों के साथ लोगों की अलग-अलग टोलियां पहुंचती हैं। ये टोलियां फाग गाकर अनराये उठाने का कार्य करती हैं। फाग गायन करने वाली ये टोलियां गमी वाले घरों में पहुंचकर लोगों के गम को दूर करने का प्रयास करती हैं। यह एक रिवाज है कि होली के त्योहार पर ये टोलियां गमी वाले घरों के चबूतरे पर बैठकर वाद्य यंत्रों की ध्वनि के साथ फाग गाकर परिजनों के गम को कुछ कम करने का प्रयास करती हैं। नवाबगंज नगर के बरतल निवासी जानवीर खाँ उर्फ राजू, लालाराम, रामेश्वर दयाल, रामभजन, लड्डू सिंह, करू, नगला धोबियन निवासी राम लखन सिंह, गुड्डू सिंह, जुगाड़ी राजपूत सिंह और नगला हीरा सिंह के निवासी कप्तान सिंह राजपूत, घारम सिंह राजपूत, संतराम, नितेश जैसे लोग इन टोलियों का हिस्सा हैं। शाम होते ही ये टोलियां फाग गाते हुए नगर के आसपास की गलियों से गुजरती हैं, तो अनायास ही लोगों के कदम उनके फागों को सुनने के लिए ठहर जाते हैं। ढोलक की आवाज और फाग गायन को सुनकर आसपास के लोग भी टोली के साथ बैठकर फागों का आनंद लेते हैं और गायकों का उत्साहवर्धन करते हैं।
गमी वाले घरों में पुन: उत्साह का संचार कर रहीं फाग गायकों की टोलियां
