समारोहपूर्वक उदासीन संगत ॠषि आश्रम में आज मनाया जाएगा गुरु पर्व महोत्सव।

समृद्धि न्यूज़ अयोध्या।प्रख्यात सिद्ध महापुरुषों की तपोस्थली उदासीन संगत ऋषि आश्रम में सोमवार को विधि विधान के साथ गुरु पर्व महोत्सव मनाया जाएगा।कार्यक्रम की शुरुआत आश्रम के महंत डॉ. भरत दास ध्वजा साहेब के पूजन के साथ होगी जिसके बाद विभन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन, सत्‍संग और विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा।गुरु पर्व महोत्सव कार्यक्रम के बारे में आश्रम के महंत डॉ. दास बताते हैं कि उदासीन आश्रम की स्थापना 17वीं शताब्दी में बाबा संगत बक्श के द्वारा की गई थी। वे बड़े ही सिद्ध और तपस्वी महापुरुष थे,जिनकी समाधि इस आश्रम में स्थापित है।इस समाधि के पास जाने से आज भी उनकी दिव्य अनुभूति का एहसास होता है।उन्होंने सनातन परंपरा की स्थापना की थी और उस समय से लेकर आज तक हम सभी उनके अनुयायियों द्वारा उसी परंपरा का निर्वाहन किया जा रहा हैं।आश्रम के नाम की ऐतिहासिकता से जुड़ा सवाल पूछने पर डॉ. दास ने बताया कि उदासीन का आशय है उद-ब्रह्मा-आसीन है,अर्थात जो ब्रह्म में निरंतर चिंतन करने वाला। उन्होंने कहा कि उदासीन परंपरा हमारी वैदिक सनातन परंपरा है और इसमें वेद परंपरा में चतुर्विद संप्रदाय और उनके आचार्य सनक,सनंदन व सनत कुमार हैं। उनके द्वारा प्रवृतित इस संप्रदाय का उद्देश्य जनसेवा,पंच देवों की उपासना,गौसेवा तथा धर्म और धर्मग्रंथों की रक्षा करना है।डॉ दास बताते हैं कि उदासीन एक अद्भुत परंपरा है,जो हमारे जगद्गुरु भगवान श्रीचंद्र द्वारा स्थापित और शुरू की गई है। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीचंद्र सिखों के प्रथम गुरु नानक देव के सुपुत्र हैं और इसके साथ ही वे महातपस्वी और बड़े सिद्ध गुरुदेव हैं।उन्होंने बताया कि हमारी वैदिक व शास्त्रीय परंपरा कृतज्ञता की ही है और हमारे महापुरुषों ने वेद व शास्त्रों में ये जो पितृ-पक्ष पंद्रह दिन तक मनाया जाता है। इस दौरान हम लोग अपने गुरुओं, आचार्यों,माता-पिता व महापुरुषों के निमित्त इस पितृ-पक्ष यानी पंद्रह दिन के पखवाड़े में हम लोग शास्त्रसम्मत एवं विधि-विधान से उनकी पूजा-अर्चना करते हैं।इस अवसर पर ध्वजा साहेब का पूजन किया जाता है।इस गुरु महापर्व महोत्स्व में आश्रम के अनुयायी,भक्त व श्रद्धालु आदि सभी जन बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।इस दौरान श्रीमद्भभागवत ज्ञान यज्ञ,श्रीरामचरित मानस अखंड पाठ,महापुरुषों-संतों द्वारा आशीष वचन,सत्संग एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है।

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