मानसिक उत्पीडऩ का लगाया गंभीर आरोप
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में कार्यरत लिपिक संवर्ग ने अपने ही अधिकारी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है। लिपिकों ने सीएमओ पर मानसिक उत्पीडऩ, काम के नाम पर प्रताडि़त करने, अभद्र भाषा का प्रयोग करने और बिना कारण वेतन रोकने जैसे कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पूरे मामले का खुलासा शिकायती पत्र की प्रति से हुआ है। 11 अगस्त को लिखे गए पत्र में स्वास्थ्य विभाग के कई कर्मचारियों के हस्ताक्षर मौजूद हैं, जिन्होंने एकजुट होकर उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। दिए गए पत्र में लिपिकों ने अपनी प्रमुख समस्यायें रखी। लिपिकों का कहना है कि कार्यालय का निर्धारित समय सुबह 10 बजे से शाम 05 बजे तक है। इसके बावजूद सीएमओ द्वारा कुछ कर्मचारियों को रात लगभग 12 बजे तक कैम्प कार्यालय में फाइलों पर हस्ताक्षर के लिए बुलाया जाता है और हैरानी की बात यह है कि बिना हस्ताक्षर किए ही उन्हें वापस भेज दिया जाता है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें अकारण पटल बदलने और डी0ओ0 पत्र लिखने की धमकी दी जाती है। साथ ही, उनके साथ अभद्र भाषा का भी प्रयोग किया जाता है। ब्लॉक स्तर पर तैनात लिपिकों को शासनादेश के विपरीत मुख्यालय पर सम्बद्ध कर दिया गया है। इस फैसले से ब्लॉक स्तर के कार्यों में भारी कठिनाई आ रही है और सरकारी कार्य लंबित हो रहे हैं। कर्मचारियों ने स्पष्ट मांग रखी है कि यदि अवकाश के दिनों में कार्यालय खुलवाया जाता है या काम पर बुलाया जाता है, तो इसके लिए बाकायदा लिखित आदेश पारित किए जाएं। सबसे गंभीर आरोपों में से एक यह है कि सीएमओ द्वारा कुछ लिपिकों का मई 2026 माह का वेतन बिना किसी स्पष्ट कारण के रोक दिया गया है। सीएमओ के इस रवैये से मानसिक रूप से परेशान होकर लिपिकों ने जिले और मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया है। लिपिकों ने जिलाधिकारी, अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कानपुर मण्डल कानपुर, मुख्य विकास अधिकारी को भेजा है। पत्र में अतुल कटियार, देवेश गौतम, संतोष, अमरेन्द्र, रूबी गौतम, श्वेता समेत दर्जन भर कर्मचारियों के हस्ताक्षर हैं।
स्वास्थ्य विभाग के लिपिकों ने खोला सीएमओ के खिलाफ मोर्चा
