आकांक्षा हत्याकांड: चार सालों में भी यूपी की हाईटेक पुलिस हत्यारोपियों का नहीं लगा सकी सुराग

पीडि़ता का पिता बेटी को न्याय दिलाने के लिए काट रहा दफ्तरों के चक्कर हत्यारोपियों के भय से गांव से पलायन कर चुका पीडि़त का परिवार

शमशाबाद, समृद्धि न्यूज। भले ही योगी सरकार में पुलिस कितनी भी सफलताएं पा चुकी हो, लेकिन शमसाबाद थाना क्षेत्र के गांव किसरोली की नाबालिक छात्रा जिसकी 4 वर्ष पूर्व निर्मम हत्या कर दी गई थी। छात्रा का पिता न्याय के लिए सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष के नेताओं की चौखट की ड्यूढी के चक्कर काट रहा है, लेकिन आज तक उसको न्याय नहीं मिल पाया है। उसका आरोप है की कुछ सत्ता पक्ष नेताओं द्वारा सजातीय दोषियों को बचाने का प्रयास किया जाता रहा है। सत्ता में ऊंची पहुंच होने के कारण पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर पा रही। जिस कारण उन्हें न्याय मिलने में देरी हो रही है। बताते चलें कि 13 अक्टूबर 19 को शमसाबाद थाना क्षेत्र के गांव किसरोली निवासी 16 वर्षीय छात्रा आकांक्षा सक्सेना कोचिंग को निकली थी, लेकिन घर नहीं पहुंची। 14 अक्टूबर 19 को आकांक्षा का शव गांव से ही डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर रेलवे ट्रैक पर नग्न अवस्था में पड़ा मिला था। छात्रा के पैर गायब थे जब उसके पिता ने शव की शिनाख्त पुत्री के रूप में की तो उन्होंने हत्या की आशंका जताते हुए डॉग स्क्वायड टीम बुलाने की फरियाद की थी, लेकिन तत्कालीन थाना प्रभारी रामबाबू पटेल ने झूठा आश्वासन देकर आनन-फानन में शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मुकदमा लिखने की बात कही। जब पिता थाने में रिपोर्ट लिखाने गया, तो थाना प्रभारी ने आत्महत्या बताकर रिपोर्ट लिखने से इंकार कर दिया था घटना के कुछ दिन बाद ही जनपद में निरीक्षण पर आए एडीजी प्रेम प्रकाश से छात्रा के पिता शिवकुमार व समाज के अन्य लोगों ने मिलकर पूरी घटना से अवगत कराया और कहा कि तत्कालीन शमसाबाद थानाध्यक्ष रामबाबू पटेल व सिपाही अंकित गंगवार ने दोषियों से साठगांठ कर ली है जिस कारण उसकी रिपोर्ट पंजीकृत नहीं हुई उसकी पुत्री की दुष्कर्म करने के बाद हत्या कर दी गई है उसके पैर भी तलाश नहीं किए गए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया एडीजी प्रेम प्रकाश ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढऩे के बाद तत्कालीन शमसाबाद थानाध्यक्ष रामबाबू पटेल को तत्काल प्रभाव से मुकदमा पंजीकृत करने के आदेश दिए थे। तब जाकर आकांक्षा हत्याकांड का मुकदमा दर्ज किया गया था। छात्रा के पिता ने बसपा में विधायक रहे एक नेता जो वर्तमान में सत्ता में हैं उन पर दोषियों को बचाने का आरोप भी लगा था। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी घटना से अवगत कराया था। कई बार शिकायत करने के बावजूद थाना प्रभारी ने मेरी रिपोर्ट कई बार बदलवाई औप उसमें काटा पीटी की, लेकिन रिपोर्ट क्यों नहीं लिखी गई। जब रेलवे किसी भी अनहोनी घटना से इनकार कर रही है तो पुलिस ट्रेन से कटकर छात्रा की हत्या को आत्महत्या कैसे बता रही है। थाना पुलिस द्वारा मुझे और मेरे परिवार को कोई सुरक्षा प्रदान नहीं की गई। जिस कारण मेरा परिवार गांव से पलायन कर गया। इस मामले में पुलिस द्वारा विभिन्न प्रकार की जांच की गई, लेकिन छात्रा के पिता शिव कुमार का आरोप है की सत्ता पक्ष के कुछ नेता दोषियों को बचाने का भरसक प्रयास कर रहे हैं। आज सत्ता पक्ष दोषियों को बचा रहा है, लेकिन मुझे उम्मीद है कि ईश्वर न्याय अवश्य करेगा। शायद अगर मैं गांव में रहता तो मेरी पुत्री की तरह मेरे साथ भी आरोपी कोई अप्रिय घटना अवश्य घटित करते हैं जिस कारण मैं सुरक्षा न मिलने से वंचित रहा और अपने गांव से पलायन कर गया हूं। आकांक्षा की मौत को चार वर्ष हो गए पर मैंने अभी हार नहीं मानी है। मैं अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा। वर्तमान में घटना की जांच इटावा पुलिस कर रही है।

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