चीन ने यूएई के साथ मिलकर की बड़ी डील
चीन को इस बात की जानकारी थी कि यूएई की अमेरिका के साथ एफ-35 लड़ाकू विमान बेचने की डील खत्म हो चुकी है। चीन ने यूएई को पहली बार संयुक्त हवाई अभ्यास का ऑफर दिया।
ईरान और इस्राइल के बीच रहे तनाव ने पूरे पश्चिमी एशिया को दो हिस्सों में बांट दिया है। वहीं अमेरिका इसमें बीच में फंस गया है। अमेरिका के लिए इस समय पसोपेश वाली स्थिति है कि वह इस्राइल का साथ दे या उसके पश्चिम एशिया में सहयोगी मुस्लिम देशों का। पहले फिलीस्तीन-इस्राइल संघर्ष और अब ईरान-इस्राइल के बीच रहे तनाव ने चीन की खाड़ी देशों में कूटनीतिक पहुंच बनाने का रास्ता तैयार कर दिया है। पहले चीन ने ईरान और सऊदी अरब की पुरानी दुश्मनी को दोस्ती में बदलवाया, वहीं अब संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को अपने पांचवी पीढ़ी के जे-20 स्टील्थ लड़ाकू विमान बेचने की तैयारी कर रहा है। यूएई ने 2020 में अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन का एफ-35 लाइटनिंग II फाइटर जेट खरीदने की इच्छा जताई थी। 2020 में ही अमेरिका की मध्यस्थता में संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने इस्राइल के साथ संबंध सामान्य किए थे, जिसे ‘अब्राहम समझौता’ कहा जाता है। दोनों देशों के बीच राजनयिक और कारोबारी संबंध भी स्थापित हुए और दोनों के बीच हवाई सेवा भी शुरू हो गई। कहा जाता है कि इन संबंधों का आधार अमेरिका और यूएई के बीच 50 एफ-35 लड़ाकू जेट, 18 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन और 10 अरब डॉलर से अधिक के सैन्य साजो सामान की खरीदारी थी। अगर यह सौदा अंजाम तक पहुंच गया होता, तो यूएई एफ-35 जेट और रीपर यूएवी दोनों पाने वाला पहला अरब देश होता। उस समय इस सौदे पर इस्राइल की भी मौन सहमति थी। उस दौरान इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और इस्राइल के रक्षा मंत्री बेनी गैंट्ज ने अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद कहा कि वे रक्षा समझौते का विरोध नहीं करेंगे, क्योंकि अमेरिका इस क्षेत्र में इस्राइल की सैन्य बढ़त सुनिश्चित करेगा।
