पेरिस पैरालंपिक में भारत के लिए मेडल आने का सिलसिला जारी है. शनिवार 7 सितंबर को भारत की झोली में 1 और गोल्ड मेडल आया. इसके साथ ही भारत के पास अब 7 गोल्ड हो गए हैं. ये कारनामा नवदीप सिंह ने मेंस जैवलिन थ्रो F41 कैटेगरी में किया. इस कैटेगरी में मेडल जीतने वाले में वो पहले खिलाड़ी हैं. इस कैटेगरी में कम हाइट वाले एथलीट हिस्सा लेते हैं. नीरज चोपड़ा तो पेरिस में गोल्ड नहीं जीत सके थे लेकिन उन्हें अपना प्रेरणा का स्त्रोत मानने वाले नवदीप ने समाज से मिलते तानों के बीच ये गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया है. 4 फुट 4 इंच के हरियाणा इस खिलाड़ी के लिए सफलता के इस मुकाम तक पहुंचने का सफर कठिनाइयों से भरा रहा है.
24 साल के नवदीप ने तीसरे प्रयास में 47.32 मीटर का थ्रो किया था, लेकिन ईरान के एथलीट सादेग बेत सयाह ने 47.64 मीटर थ्रो करके गोल्ड पर कब्जा जमाया लिया. हालांकि, इवेंट के बाद पैरालंपिक के नियमों का उल्लंघन करने के कारण उन्हें डिस्क्वालिफाई किया गया और नवदीप का सिल्वर गोल्ड में अपग्रेड हो गया. इससे नवदीप के खुशी का ठिकाना नहीं रहा. ये सफलता उनके जुनून का फल है, क्योंकि हरियाणा के बुआना लाखू गांव में पले-बढ़े नवदीप बचपन से ही बौनेपन का शिकार थे. पड़ोस के बच्चें उन्हें “बौना” कहकर ताने देते थे. इसके कारण उनका घर से निकलना मुश्किल हो जाता था. नवदीप ने जब ये कारनामा किया तब उनके भाई मनदीप श्योराण और मां मुकेश रानी उन्हें चीयर कर रहे थे. मुकाबले के बाद उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस के इंटरव्यू में खुलासा किया कि पड़ोस के सभी बच्चे उनकी हाइट को लेकर चिढ़ाते थे. इससे नवदीप परेशान होकर खुद को कमरे में बंद कर लेते थे. वह कई दिनों तक घर से बाहर तक नहीं निकलते थे, लेकिन 2012 से ये तस्वीर धीरे-धीरे बदलनी शुरू हुई. दरअसल, 2012 में नवदीप को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया और इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा.
