निकाय चुनाव: अध्यक्ष पद पर अभी तक निर्दलीय प्रत्याशियों का रहा कब्जा

कंपिल, समृद्धि न्यूज। जनपद के पश्चिमी छोर पर स्थित नगर पंचायत कंपिल की पहचान ऐतिहासिक व पौराणिक है। यह धरती जैन तीर्थस्थली के साथ साथ महाभारत काल की द्रोपदी की जन्मस्थली भी है। यहां सतयुग व त्रेतायुग के साक्ष्य आज भी मौजूद हैं। यहां की राजनीतिक महाभारत का खास पहलू यह भी है कि यहां चुनावी स्वयंवर में केवल सपा, बसपा समर्थित उम्मीदवार के साथ निर्दलीय उम्मीदवार ही जीत की माला पहन पाया है। अन्य पार्टियां यहां अभी तक अपना खाता भी नहीं खोल सकी हैं।
नगरीय निकाय चुनाव में चुनाव को लेकर प्रत्याशियों द्वारा हर संभव गठजोड़ बैठा रहे हैं। जिसके अंतर्गत यहां तक देखा जा रहा है कि प्रत्याशी कस्बे में रहने वाले अपने जातिगत मतदाताओं को जातिगत तौर पर लोक लुभावने वादों से रिझा रहे हैं, तो कई प्रत्याशियों ने जातिगत परिवारों से दूर-दूर के नाते रिश्तेदारी निकाल ली है, तो वहीं कई प्रत्याशी अपने ही परिवार के रूठे हुए मतदाताओं को मनाने के लिए अपने रिश्तेदारों से दूरियां मिटाने को कह रहे हैं। निकाय चुनाव में अगर मतदाताओं की बात करें तो नगर पंचायत कंपिल में करीब 11554 वोटर हैं। जिनमें जातिगत आधार पर सबसे ज्यादा मुस्लिम और शाक्य बिरादरी से हैं। पिछले चुनावों के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो यहां दो-दो बार ब्राह्मण, बाथम व यादव समाज से चेयरमैन चुने जा चुके हैं। प्रथम बार करीब 34 वर्ष पहले हुए चुनाव में चेयरमैन बने डॉ0 उपेंद्र दत्त शर्मा ब्राह्मण समाज से आते हैं। उन्होंने निर्दलीय चुनाव जीता था। इनके बाद अब तक पांच अन्य अध्यक्ष चुने जा चुके हैं।
मतदाताओं को बताई जा रही ये खास बात
प्रत्याशी जनसंपर्क के दौरान मतदाता की जाति के कार्यकर्ता को आगे की पंक्ति में रखकर ही मतदाता से मिल रहे हैं। इस दौरान प्रत्याशी मतदाताओं को यह भी बता रहे है कि उनकी जाति के लोगों का महत्वपूर्ण अवसरों पर कितना ख्याल रखा गया। इसके लिए कुछ कार्यकर्ता बाकायदा वार्डवार मतदाताओं की सूची लेकर चल रहे हैं और संबंधित जाति के नामों को गिना रहे हैं।
प्रत्याशियों के व्यवहार में घुली मिठास
निकाय चुनाव अंतर्गत अध्यक्ष व सभासद पद के प्रत्याशियों के व्यवहार में अचानक से मिठास घुली नजर आ रही है। कुछ मतदाताओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हमारे वार्ड के प्रत्याशी तो हमें कभी ऐसे महसूस ही नहीं हुए कि वह इतने सज्जन और इतने सहनशील व्यवहार के धनी हैं। यह तो हमें अभी चुनाव में पता चला। यदि चुनाव नहीं होते तो हम इतने अच्छे व्यक्ति को पहचान ही नहीं हो पाती। अब तो ऐसा लग रहा है कि जैसे सारे अच्छे प्रत्याशी हमारे ही वार्ड में हैं। प्रत्याशियों के सामने से जितनी बार निकलो उतनी ही बार राम-राम, राधे-राधे के साथ अपने संबंध याद दिला रहे हैं।
………….एक-एक मत पर है नजर…………
नगर निकाय चुनाव में उम्मीदवारों को एक-एक वोटों पर नजर है। इसी क्रम में बड़े शहरों में कारोबार के सिलसिले में रहने वाले लोगों को बुलाने की हर जतन की जा रही है। समर्थकों द्वारा फोन से संपर्क करके लोगों को बस और ट्रेन का टिकट के लिए किराया भी भेजा जा रहा है। साथ ही आने जाने के दौरान भोजन की व्यवस्था में भी गुरेज नहीं किया जा रहा है।
मतदाताओं की संख्या
शाक्य-1800, बाथम- 1200, यादव-1000, ब्राह्मण- 700, लोधी- 500, अनुसूचित जाति- 2800, अल्पसंख्यक-2000,
अन्य – 1500 मतादाता हैं।
अब तक के अध्यक्ष
वर्ष-1998 डॉ उपेंद्र दत्त शर्मा
वर्ष-1995- सीताराम बाथम
वर्ष-2002- विमला बाथम
वर्ष-2007- पुष्पा शुक्ला
वर्ष-2012-उदयपाल सिंह
वर्ष-2017-उदयपाल सिंह
रनरअप रहे प्रत्याशी
वर्ष-1989- नसीर अहमद
वर्ष-1995- नसीर अहमद
वर्ष-2002- हफीजन बेगम
वर्ष-2007- बेचेलाल शाक्य
वर्ष-2012- बेचेलाल शाक्य
वर्ष-2017- रावेज खॉ

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