कम्पिल, समृद्धि न्यूज। बाढ़ का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। करीब एक महीने से लोग गंगा के उफान से जूझ रहे हैं। अब उस पर से पैदल आवाजाही का सहारा बना जुगाड़ू पुल भी तेज बहाव में टूट गया। ग्रामीणों की हालत यह हो गई कि न नाव समय पर पहुंची और न सुरक्षित रास्ता मिल सका। बाजार से लौटे लोग घंटों धूप में खड़े रहे। वहीं कई लोग मजबूरी में टूटी सडक़ से गुजरने को विवश हो गए। रुक-रुककर हो रही लगातार बारिश ने ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ा दीं।
सोमवार दोपहर ग्रामीणों द्वारा बल्ली और गाटर डालकर बनाया गया अस्थायी पुल तेज धारा में बह गया। इसके बाद कम्पिल-बदायूं मार्ग पूरी तरह ठप हो गया। आसपास के 15 से अधिक गांवों के हजारों लोग इसी रास्ते से कस्बे और बाजार तक आते जाते हैं। इनमें गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और बीमार लोग भी शामिल हैं। पुल टूटने से रामेश्वरनाथ मंदिर के पास बड़ी संख्या में लोग नाव का इंतजार करते रहे, लेकिन दो घंटे तक कोई नाव नहीं पहुंची। भूखे.प्यासे खड़े ग्रामीणों में से कुछ ने जान जोखिम में डालकर टूटी सडक़ पार करने की कोशिश की। प्रशासन का दावा है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में 29 नावें चलाई जा रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। नावें या तो देर से पहुंच रही हैं या फिर जरूरतमंद गांवों तक पहुंच ही नहीं पा रहीं। गांव के रामकिशोर ने कहा हम सुबह से नाव का इंतजार कर रहे थे। महिलाएं और बच्चे साथ थे, लेकिन कोई नाव नहीं आई। मजबूरी में टूटी सडक़ से ही गुजरना पड़ा। हर कदम पर डर था कि कहीं बह न जाएं। श्वहीं संतोष देवी बोलीं मेरे पति बीमार हैं। दवा लेने कस्बे गई थी। लौटते वक्त पुल टूट चुका था। घंटों इंतजार करने के बाद भी नाव नहीं मिली। आखिरकार जान जोखिम में डालकर लौटना पड़ा। साथ ही दिन भर रुक-रुककर हुई बरसात ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। जिससे सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों को हुई। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बाढ़ के मौसम में यही समस्या सामने आती है। अस्थायी इंतजाम से बात नहीं बनेगी। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द पक्का पुल और स्थायी सडक़ का निर्माण कराया जाएए ताकि उन्हें हर बार बाढ़ के समय जान जोखिम में डालकर सफर न करना पड़े। देर शाम एसडीएम के आदेश पर स्टीमर की व्यवस्था की गई। जिसके बाद लोगों का आवागमन देर रात तक चलता रहा। इस बाबत नायब तहसीलदार हर्षित ने बताया कि ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए नाव उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं तहसीलदार विक्रम सिंह चाहर ने दावा किया कि क्षेत्र में पर्याप्त नावें चल रही हैं और जरूरत पडऩे पर अतिरिक्त नावों की व्यवस्था भी की जाएगी।
बाढ़ के तेज बहाव में बह गया ग्रामीणों द्वारा बनाया गया जुगाड़ू पुल
