बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष ने बैठक कर गबन के लगे आरोपों को बताया निराधार

  उन्नाव, समृद्धि न्यूज। अधिवक्ता भवन के संम्बन्ध में अध्यक्ष बार एसोसिऐशन द्वारा बिना किसी आवंटी अधिवक्ता अथवा किसी अन्य अधिवक्ता द्वारा शिकायत के बिना ही बदले की भावना से विगत बार चुनाव सम्पन्न होने के तत्पश्चात सदन की बैठक में मनमाने तरीके से सदन संचालित करते हुये मनमाने निर्णय किये जा रहे है जो उचित नही है और सदन की गरिमा के विपरीत है।

पूर्व में नियुक्त अध्यक्ष बार एसोशिएशन सतीश कुमार शुक्ला व नि० महामंत्री अरविन्द कुमार दीक्षित द्वारा स्व प्रमाणित आय व्यय का विवरण मय नक्शा व आवंदी अधिवक्ताओ सूची सहित बार एसोसिएशन कार्यालय में जमा की जा चुकी है जिसमें कमी निकालते हुये अध्यक्ष ने एक दो प्रपत्रों पर हस्ताक्षर न होना बताया। अध्यक्ष बार एसोसिएशन के मनमाने तरीको के प्रति प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये सतीश शुक्ल ने कहा कि अध्यक्ष गिरीश मिश्रा कार्य कर रहे है। राजनैतिक प्रतिदन्दी रहे है अगर तीन तीन चुनाव में पराजित हुये है और वर्तमान में बदले की भावना दुर्भाग्य पूर्ण है। नि० अध्यक्ष सतीश कुमार शुक्ला ने बताया कि अध्यक्ष बार एसोसिएशन की इन्ही गतिविधियों के कारण तकनीकी जांच पर भरोसा नही है इसलिये वह स्वयं योग्य व प्रमाणित सिविल इंजीनियर से तीनों अधिवक्ता भवनों के साथ साथ सरदार पटेल व डा० अम्बेडकर अधिवक्ता भवन की जांच अपने स्तर से करायेंगे। नि० अध्यक्ष सतीश कुमार शुक्ला ने आगे यह भी कहा कि जो लोग भी इस समय उनके विरोध में अध्यक्ष बार एसोसिएशन के समर्थन में खड़े है वे सभी मेरे समक्ष आगामी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ना चाहते है। और हमें चुनाव लड़ने से रोकना चाहते है।

नि० अध्यक्ष सतीश कुमार शुक्ला व साथ में मौजूद नि० महामंत्री अरविन्द दीक्षित तथा नि० वरिष्ठ सदस्य कार्यकारिणी ने बताया कि बीते दिन नि० अध्यक्ष बार सतीश कुमार शुक्ला की जांच का आपरेशन होने की जानकारी होते ही मात्र 14 घण्टे पूर्व सोशल मीडिया पर सूचना देकर मीटिंग बुलाकर मनमाने तरीके से आर्थिक सर्वे व अपने ही लोगों द्वारा करायी गयी जांच रिपोर्ट लेकर 76.77 लाख का गवन बताते हुये मांडल बायलाज के नियमों के विपरीत निष्कासित करते हुये एक माह के अन्दर उक्त धनराशि बार एसोशिएशन में न जमा करने की स्थिति में उनके व नि० महामंत्री अरविन्द दीक्षित के विरूद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीकृत कराये जाने का निर्णय सदन में मनमाने तरीके से लिया है।

सतीश शुक्ला ने आगे यह भी कहा कि यदि उन पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच हो अगर वे मनगढ़न्त और इतनी बड़ी धनराशि के दोषी पाए जाने पर वे बार की राजनीति के साथ साथ दलगत राजनीति से सन्यास ले लेंगे। सतीश शुक्ला ने कहा कि आठ बार का अध्यक्ष अधिवक्ताओं ने उनकी कार्य शैली व उनकी सुचिता के कारण ही बनाया है उन्होने कभी किसी अधिवक्ता के निष्कासन् जैसी कार्यवाही नही की। उन्होने कहा जब जब मेरा बार एसोसिएशन से उनके राजनैतिक विरोधी अध्यक्षों द्वारा निष्कासन् किया गया है तब तब बार कौंसिल ने उनका निष्कासन् निरस्त किया है

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