आनंद मठ के संन्यासियों व आजादी की क्रांति पर कालाकारों ने प्रस्तुत किया नाटक

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। माघ मेला रामनगरिया गंगातट, पांचाल घाट के सांस्कृतिक पांडाल के मंच पर आनंद मठ उपन्यास लेखक बंकिमचंद्र उपाध्याय द्वारा लिखित कुछ अंशों को लेकर अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती के कला साधकों ने राष्ट्र सर्वोपरि का संदेश: देते हुये भारतमाता की आराधना में वन्दे मातरम् की 150वीं वर्ष की यात्रा के अंतर्गत नाटक का मंचन किया।
आनंद मठ संन्यासियों का आश्रम है जिसमें भारत की आजादी में क्रांति की चिंगारी सम्पूर्ण देश में ज्वालामुखी बनकर फैल गयी। भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम, चिंगारी उत्पन्न की वह भविष्य में ज्वाला बनकर युद्ध 1857 में नहीं?…बल्कि प्लासी की लड़ाई के लगभग 20 वर्ष बाद लड़ी गयी जो एक विद्रोह का नाम दिया था। सन् 1770 में आनंद मठ के संन्यासियों ने क्रांति की चिंगारी पहले ही भडक़ा दी थी। आनंद मठ (उपन्यास) सन् 1882 में भारत माता के सपूत राष्ट्रभक्त बंकिमचंद्र चटर्जी ने उपन्यास लिखा-अंग्रेजों ने संन्यासियों का विद्रोह को लूटमार,डकैती ठहराया, लेकिन सत्य कभी नष्ट नहीं जा सकता, घटना क्रम सन् 1770 में बंगाल का अकाल भूखमरी, महामारी, जिसका इस समय हाल मिलती परिणाम स्वरूप लगभग आधी आबादी मौत का निवाला बन गयी, जो जिन्दा रह गये वह जंगलों में भटकने लगे, अपनी-अपनी जायजात ही नहीं? अपनी मां, बहन, बेटियों की इज्जत बेचकर अपना पेट भरने लगे। नाटक प्रस्तुत कर भारत माता के जयघोष के नारे लगे। नाटक ने सभी को भावविभोर कर दिया। कला-साधक अरविन्द दीक्षित के द्वारा लिखा गया जिसको संस्कार भारती की इकाई संस्कार भारती के कला साधकों ने अपनी प्रस्तुति दी। सनातन संस्कृति में दीप प्रज्ज्वलित किया, श्रीगणेश किया और संस्कार भारती के कला साधकों की प्रशंसा की जो सम्पूर्ण भारत में राष्ट्र भक्ति की भावना उत्पन्न कर रहे हैं। नाटक में सूत्रधार नवीन मिश्रा नब्बूभैया, राजा महेन्द्र सिंह- अरविन्द दीक्षित, कल्याणी रानी-कु0 राना हिजाब, आनन्दमठ के महन्त-सुरेन्द्र पाण्डेय, भवानन्द-उज्ज्वल पाण्डेय, जीवानन्द- नमन पाण्डेय, शान्ति आनन्द-देव मिश्रा, ब्रिटिश शासक- अनुपम पाण्डेय, वैभव सोमवंशी, सुमित पाण्डेय, ध्वनि प्रकाश-समरेंद्र शुक्ला, कम्प्यूटर (दृश्य परिकल्पक)-विशाल श्रीवास्तव, मंच सज्जा अभिषेक दुबे संगीत, अन्य सहयोगी-रवीन्द्र भदौरिया आदि मौजूद रहे।

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