उन्नाव, समृद्धि न्यूज। दही थाना क्षेत्र अंतर्गत संचालित चर्म निर्यात इकाइयों में अवैध रूप से रहकर मजदूरी कर रहे बांग्लादेशी नागरिक को एटीएस लखनऊ ने देर रात छापेमारी कर गिरफ्तार किया। वह फर्जी भारतीय दस्तावेजों के सहारे स्लाटर हाउस में मजदूरी कर रहा था। इस कार्रवाई के बाद औद्योगिक क्षेत्र के चर्म फैक्टरियो में हड़कंप मच गया है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान सैफुल पुत्र फरीदुल आलम निवासी लंबामथ,
नाइकस्यांगछारी मौजा, बंदरबन (बांग्लादेश) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार सैफुल लगभग पांच से छह वर्ष पहले अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ था। उसने पूछताछ में बताया कि वह बांग्लादेश से बेनापोल–24 परगना (पश्चिम बंगाल) और खुलना बॉर्डर के रास्ते अवैध रूप से भारत में पहुंचा था।
सैफुल ने पहले एक वर्ष मुंबई में रहकर पंखे के रेगुलेटर बनाने का काम किया। इसके बाद वह उन्नाव आ गया और दही औद्योगिक क्षेत्र के स्लाटर हाउसों में नौकरी करने लगा। एटीएस को सूचना मिली थी कि दही औद्योगिक क्षेत्र की मांस निर्यातक इकाइयों में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक फर्जी भारतीय दस्तावेज बनवाकर काम कर रहे हैं और शिवनगर जैसे मोहल्लों में किराए के मकानों में रह रहे हैं।
इसी सूचना के आधार पर बीतीरात शिवनगर मोड़ पर सैफुल को दबोचा गया। उसके पास से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ, जिसकी जांच में उसके नाम से बना जाली भारतीय आधार कार्ड मिला। आधार कार्ड पर विशाल धर्म कांटा का पता दर्ज था और उसकी उम्र 29 वर्ष थी।
तलाशी के दौरान सैफुल की जेब से भारतीय मुद्रा भी बरामद हुई। मोबाइल की गैलरी में उसके परिजनों – पिता फरीदुल आलम, मां खदीजा बेगम और फातिमा बेगम – के बांग्लादेशी पहचान दस्तावेजों की तस्वीरें भी मिलीं, जो वर्ष 2008 में जारी हुए थे। दही थाना पुलिस मामले में आगे की कार्यवाही कर रही है।
पूछताछ में सैफुल ने स्वीकार किया कि उसने एक दलाल के माध्यम से फर्जी आधार कार्ड बनवाया था, हालांकि वह दलाल का नाम स्पष्ट रूप से नहीं बता सका। उन्नाव में उसने पहले नूर मोहम्मद की मीट कंपनी ‘नूर इंटरप्राइजेज’ में काम किया और बाद में दही औद्योगिक क्षेत्र स्थित जेएस स्लाटर हाउस में हेल्पर के रूप में कार्य करने लगा।
