सरसों व तम्बाकू की फसल पर तेजाब बनकर गिरी वारिश व ओले

खेतों में खुदे पड़े आलू को भी हुआ नुकसान, अन्नदाता हुआ परेशान
कंपिल, समृद्धि न्यूज। हाड़ तोड़ मेहनत और गाढ़ी कमाई की लागत से तैयार फसल बर्बाद होने का दर्द कोई किसान ही समझ सकता है, हालांकि साल दर साल घाटा सहकर भी उसी निष्ठा और विश्वास से फिर खेतों में उतरने की हिम्मत के लिए भी किसान का बेटा होना जरूरी है। विगत लगभग दो सप्ताह से चल रही मौसम की बदमिजाजी से किसान बदहाल है। तेज हवाओं पर सवार बारिश और ओलों की बौछारों ने गेहूं, सरसों, आलू और तंबाकू किसानों की कमर तोडक़र रख दी है।
क्षेत्र के गांव सवितापुर, बिहारीपुर, पुरौरी, सिंकदरपुर, कटिया आदि के आसपास गांवों में तंबाकू की फसल में पानी भर जाने और ओलावृष्टि से पत्ती में छेद हो जाने से किसान बहुत दु:खी है। ओलावृष्टि से सरसों की फसल खेत में ही झड़ गई है। कई जगह खेतों में लगे आलू के ढेरों में भी पानी भर गया है। पुरौरी निवासी चंद्रपाल की कटी पड़ी एक बीघा सरसों की फसल खेत में ही झड़ गई। इसी गांव के अखिलेश कुमार ने बताया कि क्षेत्र की लगभग 50 फीसदी फसल खेत में ही झड़ गई। तेज बारिश में आम के जिन बागों में छिडक़ाव हुआ था उनकी दवा भी धुल गई है। उन्हें फिर से छिडक़ाव कराना होगा। ओलों से काफी बौर झड़ गया है। किसान व बागवानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें दिखाई पड़ रही हैं। कटिया के किसान अदील खां का कहना है कि पहले हुई बरसात से काफी नुकसान हो चुका है। बची हुई फसलों से किसानों को उम्मीद है। यदि मौसम ने साथ न दिया तो किसान बर्बाद हो जाएगा। गांव सिकंदरपुर के किसान मोरपाल सिंह का कहना है कि गेहूं व सरसों की फसलों को काफी नुकसान हुआ है। साथ ही खुदे पड़े आलू में भी नुकसान है। तंबाकू के लिए पानी जहर का काम कर रहा है।

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