शिमला में बीच हाईवे पर भिड़े 2 राज्यों के अधिकारी?, रातभर चला ड्रामा

समृद्धि न्यूज। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में दिल्ली पुलिस और शिमला पुलिस के बीच जर्बदस्त तनातनी रही और रातभर जोरदार हंगामे की स्थिति बनी रही। ट्रांजिट रिमांड के सिलसिले में शिमला पहुंची दिल्ली पुलिस की टीम को घंटों रोका गया। दोनों ओर से तीखी बहस भी हुई। कई घंटे चले हंगामे के बाद सुबह 6 बजे के करीब दिल्ली पुलिस को शोघी बैरियर से दिल्ली की ओर जाने की अनुमति दे दी गई। तीनों आरोपी सौरभ, अरबाज और सिद्धार्थ को रात करीब 1 बजे एसीजेएम एकांश कपिल के आवास न्यायालय में पेश किया गया, जहां दिल्ली पुलिस की ट्रांजिट रिमांड की याचिका पर सुनवाई हुई और उसे स्वीकार कर लिया गया।

एआई समिट में शर्टलेस प्रोटेस्ट के 3 आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर लाए जाने के दौरान दिल्ली पुलिस की गाड़ी जब्त कर ली गई और शिमला पुलिस ने टीम से एफआईआर दर्ज कर पूछताछ में शामिल होने को कहा था। भारत सरकार की ओर से वरिष्ठ पैनल वकील नंदलाल ठाकुर ने बताया कि हमने सबसे पहले यहां के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को आवेदन दिया। उन्होंने आवेदन आगे भेज दिया। अब न्यायालय संख्या 2 (एसीजे) के स्थानीय मजिस्ट्रेट ने उनकी पुलिस ट्रांजिट रिमांड को मंजूरी दे दी है। अब तीनों आरोपियों को दिल्ली की उस अदालत में संबंधित स्थानीय मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा जहां एफआईआर दर्ज की गई थी।

इससे पहले दिल्ली पुलिस द्वारा शिमला जिले के रोहड़ू से हिरासत में लिए गए तीन युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को देर रात शिमला की अदालत में पेश किया गया। पहले नई दिल्ली में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन के दौरान हुए विरोध-प्रदर्शन मामले में शामिल तीन युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जिला शिमला के रोहड़ू क्षेत्र से गिरफ्तारी को लेकर शिमला में बुधवार रात तक हाई वोल्टेज ड्रामा चलता रहा। शिमला पुलिस ने दिल्ली पुलिस को रोक लिया। दिल्ली पुलिस की टीम से पूरी रात पूछताछ की गई, फिर सुबह 6 बजे के करीब दिल्ली पुलिस शिमला के शोघी बैरियर से रवाना हो पाई। रवाना होने से पहले दिल्ली पुलिस ने शिमला पुलिस को सीजर मेमो भी दिया। पूरे विवाद में दिल्ली के एक पुलिसकर्मी ने कहा हम अब यहां से जा रहे हैं, जब उनसे पूछा गया कि क्या शिमला पुलिस ने दिल्ली पुलिस की सभी गाडिय़ों को छोड़ दिया है, तो उन्होंने हां में सिर हिलाया।

पुलिस की टीम जब आरोपियों को लेकर दिल्ली लौट रही थी तभी शिमला पुलिस की टीम ने उसे रोकने की कोशिश की, कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बावजूद शिमला पुलिस के द्वारा दिल्ली पुलिस की टीम को आरोपियों को दिल्ली ले जाने से रोकने की कोशिश की गई। रात 3 बजे के करीब कनलोग में टीम को रोका गया और सुबह 5 बजे तक शोघी बैरियर के पास रोककर रखा गया।

शिमला पुलिस ने इस बीच दिल्ली पुलिस की एक गाड़ी जब्त कर ली, टीम को नेशनल हाईवे-5 (एनएच-5) पर बीच रास्ते में रोक दिया और उनसे मामले में शिमला पुलिस की ओर से दर्ज की गई एफआईआर के संबंध में अपनी जांच में शामिल होने के लिए कहा गया। शोघी बैरियर पर शिमला पुलिस की पूछताछ के बावजूद दिल्ली पुलिस के अधिकारी गाड़ी से नीचे नहीं उतरे। दिल्ली पुलिस ने कहा कि गाड़ी में केस से जुड़े दस्तावेज हैं ऐसे में हम चाबी नहीं दे सकते। इस पर शिमला पुलिस ने कहा कि हम दिल्ली पुलिस की गाड़ी डीएल-1सीएएफ-0768 को सीज करेंगे। विवाद तब शुरू हुआ जब शिमला पुलिस ने दिल्ली पुलिस के जवानों से कहा कि गिरफ्तार किए गए 3 आरोपियों को केवल 3 जवान ही ले जा सकते हैं, जबकि अन्य पुलिसवालों को जांच में शामिल होने के लिए रुकना होगा। इस पर दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने कहा मेरे बगल में एक आरोपी बैठा है। हर कार में एक आरोपी बैठा हुआ है। हमें उन्हें सुरक्षित तरीके से पेश करना है, बस वे अपना काम कर रहे हैं, हम अपना काम कर रहे हैं। इस बीच, शिमला पुलिस ने दिल्ली पुलिस की एक गाड़ी भी जब्त कर ली। उसकी ओर से यह आरोप लगाया गया कि गाड़ी में एक डीवीआर था जिसे दिल्ली पुलिस ने एक स्वतंत्र गवाह की मौजूदगी में अपने कब्जे में ले लिया। शिमला पुलिस का कहना है कि इन तीनों आरोपियों को दिल्ली पुलिस जबरदस्ती ले जा रही है। पुलिस के मुताबिक, अनजान लोगों ने कथित तौर पर तीनों लोगों को रिजॉर्ट से उठाया और उनकी गाड़ी भी साथ ले गए।

20 घंटे बाद दिल्ली पुलिस और शिमला पुलिस में समझौता

करीब 20 घंटे चले इस ड्रामे के बाद आखिरकार दिल्ली पुलिस को प्रदेश पुलिस के सामने झुकना पड़ा और फिर पूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ही तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और उन्हें लेकर पुलिस दिल्ली निकल गई। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल रात भर शिमला में रुकने के बाद अब तीनों आरोपियों को अपने साथ लेकर दिल्ली के लिए रवाना हो रही है। आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद टीम सुरक्षा व्यवस्था के बीच राजधानी के लिए निकली। दिल्ली पहुंचने पर आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर मुद्दे पर सियासत भी हो रही है। विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने आरोप लगाए कि हिमाचल सरकार आरोपियों को बचाने के लिए ये सब कर रही है। उन्होंने कहा, इस घटना की जितनी भी निंदा की जाए कम है, पहली बार एआई समिट में मदद मिली, दुनिया भर के लीडर्स आए और वहां देश की रेप्युटेशन खराब करना देशद्रोह जैसा है। यूथ कांग्रेस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी के कहने पर काम किया, इन पर एक्शन होना चाहिए।

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