फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। आर्य प्रतिनिधि सभा के तत्वावधान में मेला श्रीरामनगरिया में चल रहे वैदिक क्षेत्र में चरित्र निर्माण शिविर में प्रात:काल यज्ञ किया गया। आचार्य चन्द्रदेव शास्त्री ने बताया कि पाप कर्म से बचने के लिए ईश्वर का सर्वत्र व्यापक मानना अत्यावश्यक है। व्यक्ति पाप कर्म इसलिए करता है क्योंकि वो ये मानता है कि हमें कोई देख नहीं रहा। मनुष्य जो भी कर्म करता है उस कर्म का फल परमात्मा अवश्य देता है। परमात्मा की न्याय व्यवस्था से कोई नहीं बच सकता। ईश्वर कण-कण में व्यापक होके सभी के कर्मों का यथायोग्य फल देता है। श्रेष्ठ कर्मों का फल सुख और बुरे कर्मों का फल दुख के रूप में प्रत्येक मनुष्य को भोगना ही पड़ता है। धर्मानुकूल आचरण के द्वारा मनुष्य दुखों से बच सकता है। आचार्य प्रदीप शास्त्री ने भजन के माध्यम से बताया कण कण में बसा प्रभु देख रहा, चाहे पुण्य करो चाहे पाप करो, जहां मनुष्य कर्म करने में स्वतंत्र है। वहीं फल भोगने में परतंत्र है। फल सुख के रूप में प्राप्त हो इसलिए मनुष्य को वेदानुकूल कर्म करने चाहिए। पण्डित दलवीर शास्त्री ने रामकथा के माध्यम से मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित किया। पण्डित धर्मवीर शास्त्री, पण्डित धनीराम बेधडक़, पण्डित शिवनारायण आर्य ने वेदोपदेश के द्वारा वेद के बताए हुए रास्ते पर चलने की प्रेरणा दी। स्वामी महेन्द्रानंद ने मंच का संचालन किया। सभा में उत्कर्ष आर्य, मंगलम आर्य, डॉ0 सत्यम आर्य, उदयराज आर्य, संदीप आर्य, हरिओम शास्त्री, शिशुपाल आर्य, अजीत आर्य, रत्नेश द्विवेदी, उपासना कटियार, उदिता आर्या, अमृता आर्या आदि उपस्थित रहे।
धर्मानुकूल आचरण के द्वारा मनुष्य दुखों से बच सकता है
