फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। मेजर एस.डी. सिंह पी.जी. आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में प्रथम वर्ष बीएएमएस एवं पीजी विद्यार्थियों के लिए आयुर प्रवेशिका (यूजी) तथा संस्कार (पीजी) अभिमुखीकरण कार्यक्रम के द्वितीय व तृतीय दिवस विविध ज्ञानवर्धक सत्रों एवं गतिविधियों के कार्यक्रम सम्पन्न हुए।
द्वितीय दिवस की की शुरुआत धन्वंतरि वंदना से हुई। डॉ0 शिव ओम दीक्षित ने विद्यार्थियों को प्रशासनिक संरचना, कैंपस अनुशासन एवं आचरण संहिता से परिचित कराया। डा0 रूचि ने आयुर्वेद के इतिहास, परिचय, मूल सिद्धांतों एवं त्रिसूत्र पर प्रभावी व्याख्यान प्रस्तुत किया। डॉ0 नितुश्री ने अवकाश, उपस्थिति तथा शुल्क प्रक्रियाओं सहित विभिन्न प्रशासनिक औपचारिकताओं पर मार्गदर्शन दिया। छात्र सुरक्षा एवं एंटी-रैगिंग दिशा निर्देशों पर डॉ0 भारती पंचाल ने जानकारी दी। पीजी छात्रों के लिए स्त्री रोग एवं शल्य विभाग में विभागीय परिचय सत्र आयोजित किए गए। पुस्तकालय अभिमुखीकरण में अमोल मसीह ने अध्ययन संसाधनों एवं शोध सुविधाओं से छात्रों को अवगत कराया। संध्याकालीन सत्र में डा0 सुमन कुंडू ने आयुर्वेद के अंतर-विषयक विस्तार और आधुनिक विज्ञानों के साथ उसके समन्वय पर प्रकाश डाला।
वहीं तृतीय दिवस यूजी कार्यक्रम की शुरुआत धन्वंतरि वंदना से हुई। अतिथि वक्ता डॉ0 स्वप्ना स्वयंप्रवा ने भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) पर प्रेरक सत्र संचालित किया। विद्यार्थियों ने अष्टांग आयुर्वेद, आयुर्वेद एवं मैं चिंतन सत्र, तथा डॉ0 कविता नेगी से वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का परिचय प्राप्त किया। दोपहर के सत्रों में डॉ0 संतोष ने आयुर्वेद का वैश्विक महत्व एवं अरिमर्दन द्वारा तैत्तिरीय उपनिषद के आनन्द विषय पर व्याख्यान तथा डॉ0 अरुण कुमार पांडे ने आयुर्वेद एवं योग की वैश्विक कूटनीति पर विचार प्रस्तुत किए। समापन डॉ0 कविता नेगी ने माइंडफुलनेस अभ्यास से किया। पीजी विद्यार्थियों के लिए समानांतर सत्रों में डॉ0 कविता नेगी ने तनाव प्रबंधन, योग एवं विश्राम तकनीकें सिखाईं। डॉ0 भारती पंचाल ने प्रमुख राष्ट्रीय अनुसंधान संगठनों का परिचय दिया। पीजी डीन ने पाठ्यक्रम एवं मूल्यांकन प्रणाली समझाई। डॉ0 नीतू श्री ने संस्थागत एमओयू एवं अनुसंधान अवसरों पर सत्र लिया। द्वितीय और तृतीय दिवस के सभी सत्रों ने यूजी तथा पीजी दोनों वर्गों के विद्यार्थियों को शैक्षणिक अभिमुखीकरण, अनुशासन एवं प्रशासन, आयुर्वेद के मूल सिद्धांत, अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य, शोध अवसरों तथा व्यक्तिगत विकास के विभिन्न आयामों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नए विद्यार्थियों को संस्था की समृद्ध शैक्षणिक और सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ते हुए उनके आगामी अध्ययन मार्ग को मजबूत आधार प्रदान किया।
मेडिकल कॉलेज में आयुरप्रवेशिका एवं संस्कार कार्यक्रम का हुआ आयोजन
