-
3 महीने में चुनाव का आदेश: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को राज्य में अगले 3 महीनों के भीतर ग्राम पंचायत चुनाव संपन्न कराने का निर्देश दिया है।
-
वर्तमान प्रधान बने रहेंगे प्रशासक: कोर्ट के निर्देशानुसार, निवर्तमान ग्राम प्रधान आगामी 3 महीने की इस अवधि तक प्रशासक के रूप में कार्य करते रहेंगे।
-
ओबीसी आयोग और आरक्षण: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ओबीसी (पिछड़ा वर्ग) आयोग अपना कार्य जारी रखेगा, लेकिन चुनाव प्रक्रिया इसके कार्य पर निर्भर नहीं रहेगी। चुनाव मौजूदा नियमों और ढांचे के तहत ही होंगे, जिसमें 27% आरक्षण की व्यवस्था का कड़ाई से पालन किया जाएगा।
विस्तृत विवरण
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने को लेकर दाखिल 11 याचिकाओं (जिसमें 6 जनहित याचिकाएं भी शामिल हैं) पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है।
राज्य में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 25 मई को ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिकाओं में समय पर पंचायत चुनाव न कराए जाने और प्रधानों को प्रशासक बनाने के निर्णय पर सवाल उठाए गए थे। इस मामले की लंबी सुनवाई के बाद 8 अक्टूबर को बहस पूरी हो गई थी, जिस पर अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
याचिकाकर्ता और पक्षकार
हाईकोर्ट में यह याचिकाएं एडवोकेट दशरथ यादव, इम्तियाज हुसैन, अनिल कुमार, अकबर अंसारी और हेमचंद्र आदि के द्वारा दाखिल की गई थीं। इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार, पंचायती राज निदेशक, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी (CDO) और जिला पंचायती राज अधिकारी (DPRO) को पक्षकार बनाया गया था। कोर्ट ने सभी 11 याचिकाओं को एक साथ संबद्ध कर सामूहिक रूप से सुनवाई पूरी की।
कोर्ट का संदेश: हाईकोर्ट के इस आदेश से उत्तर प्रदेश में लंबे समय से अटके पंचायत चुनावों का रास्ता साफ हो गया है। अब प्रशासनिक और चुनावी प्रक्रिया तयशुदा 3 महीने की समय-सीमा के भीतर पूरी की जानी है।
